शक्ल.... याद नहीं तुम्हारी ,
धुधली सी भी नहीं ,
चूल्हे -चौके राशन-रोटी में,
खो गई कहीं .....
आवाज, हाँ दोनों बच्चों की आवाज
पहचान लेती हूँ...
सौ की भीड़ में भी...
तुम्हारी आवाज , पता नहीं ....
लेकिन छोटा जब भी अपने
उस दोस्त का नाम लेता है....
आखों में लौटती है चमक...
और होठों पर एक मुस्कान खीच जाती है...
तुम्हारी यही स्मृति बाकी है ....
-ममता पंडित
धुधली सी भी नहीं ,
चूल्हे -चौके राशन-रोटी में,
खो गई कहीं .....
आवाज, हाँ दोनों बच्चों की आवाज
पहचान लेती हूँ...
सौ की भीड़ में भी...
तुम्हारी आवाज , पता नहीं ....
लेकिन छोटा जब भी अपने
उस दोस्त का नाम लेता है....
आखों में लौटती है चमक...
और होठों पर एक मुस्कान खीच जाती है...
तुम्हारी यही स्मृति बाकी है ....
-ममता पंडित
So much emotion. Keep doing it. You write very well. All the best.
ReplyDeletethank you so much Mrs Uppal...u r the inspiration...:)
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