Sunday, July 27, 2014

सुकूं..

गर उठाना हो किसी कमजोर को..
ये मत सोचना , क्यों झुकूं …
जब चल पड़ो , किसी राह पर …
ये मत सोचना, अब रुकूं…
चाहे बाहर बदले जो भी..
रखना मन में ये एक यकीं…
कोई नहीं छीन सकता…
तुम्हारे चेहरे की मुस्कराहट…
और तुम्हारे दिल का सुकूं..

-ममता पंडित

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