Sunday, July 27, 2014

शाम

शाम कुछ मायूस थी...
मै अपने काम में कुछ ज्यादा ही मसरूफ थी..
ध्यान ही नहीं दिया वो की वो आ रही है.
बड़ी देर बाद एहसास हुआ वो जा रही है ,
अब थोड़ी देर में रात हो जाएगी ,
शाम की मायूसी मेरे साथ सो जाएगी..
मै अचानक  उठी,  भागी, और उसके पास जा बैठी..

और मेरे साथ शाम फिर खिलखिला उठी..|

-ममता पंडित 

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